सोना सुग्गु जान करेजा

बात प्यार क हमके ओकर तनिको समझ न आवे

सोना सुग्गु जान करेजा कही कही के बतियावे 


हम जानित है अपने मन से छुवल चाहत हे 

अपने मन क सबरे पीड़ा धोवल चाहत हे 

हम बहुते नालायक बानी के ओके समझावे 

सोना सुग्गु जान करेजा कही कही के बतियावे


हमरे दिल में प्यार क दियनी बारल चाहेले 

येह पतझड़ में फुल कियारी रोपल चाहेले 

हमरो मन फागुन होइ जाला बाबू कही बोलावे 

सोना सुग्गु जान करेजा कही कही के बतियावे


बस एक बिंदी हउवे ओकर माथे क सिंगार

जइसे मिलल आसमान के चंदा एक उपहार

खुद सीसा जस लागे अब के सीसा ओके देखावे

सोना सुग्गु जान करेजा कही कही के बतियावे


~ धीरेन्द्र पांचाल


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