माफ हमको कीजिये
इस विलासी भावना से साफ दिल को कीजिये । प्रेम अगर सम्भोग है तो माफ हमको कीजिये । होटलों के फर्श तक हम बेहयाई लाँघकर । बण्डलों पर नोट के ईमान अपने फांदकर । जा सके न देह के व्यापार को देने दिशा । मासूका की गोद में कैसे बिताते यूँ निशा ? है बुजुर्गों का अदब ना राख हमको कीजिये । प्रेम अगर सम्भोग है तो माफ हमको कीजिये । वासना की कामना में देह की दीवार को । ढाहते कैसे भला हम प्रेम की मिनार को ? सिसकियाँ आती हैं देखी पुष्प के किरदार से । कब कहाँ कैसे बचोगे कंटकों के वार से ? हम समंदर ठीक हैं ना भाप हमको कीजिये । प्रेम अगर सम्भोग है तो माफ हमको कीजिये । यह उदासी प्रेम की निष्काम सी सम्भावना है । जायसी रसखान मीरा की सतत उपासना है । इस रइसी में न कोई डूबने की कामना । हम उपासक राम...