जबरी दूध पियावल जाला
गाढ़े परल समइया हाथे दुब जमावल जाला । सांसत में लरिका के जबरी दूध पियावल जाला । जइसे तइसे कटे उमिरिया डेरवावे परछाईं । कफ़न सरीखा इंतजाम सब कइले बा पुरवाई । घर अंगना संदूक भयल , बंदूक देखावल जाला । सांसत में लरिका के जबरी दूध पियावल जाला । मांसन के व्यापार बढ़ल रोजगार के बहुतै ठाला । टेक्नोलॉजी बेबस बा रेडिएशन खूब मंडराला । सरकारी अनुदान के मुँहवा फार के घोंटल जाला । सांसत में लरिका के जबरी दूध पियावल जाला । आफ़त में कांपत बा धरती ना केहुवो पतियाला । जंगल काट के मंगल पर अब जीवन खोजल जाला । परमाणु हथियारन के खूब शान बघारल जाला । सांसत में लरिका के जबरी दूध पियावल जाला । गाढ़े परल समइया हाथे दुब जमावल जाला । सांसत में लरिका के जबरी दूध पियावल जाला । ✍️ धीरेन्द्र पांचाल