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Showing posts from January, 2021

बचकानी बातें

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तेरी ये बचकानी बातें , तेरी वो बचकानी बातें ।। हर रोज जगाया करती मुझको वो शैतानी बातें । तेरी ये बचकानी बातें ……… हंसना और शर्माना तेरा करती दिल पे घातें । पीछे मुड़ फिर आगे बढ़ती हो जाती बरसातें । जुल्फ हटे गालों से खुले हजारों दिल मे खाते । तेरी ये बचकानी बातें ……… अधरों की लाली से झलके , चाहत की बारातें । माथे की सिकुड़न तेरी सब कह जाती जज़्बातें । तेरे ही यादों से अब तक जिंदा अपनी रातें । तेरी ये बचकानी बातें ……… फूलों को ही सहनी पड़ती काटों की आघातें । पंखुड़ियों से चलती जिनके प्यार वफ़ा के नाते । मिट्टी अपनी खुद करती है उस कंकड़ से बातें । तेरी ये बचकानी बातें ……… संगम वाली चाय प्रिये हम जाम समझ पी जाते । हँस करके तू जान पुकारे जीते जी मर जाते । गर तेरा जो साथ मिले हम खुद संगम हो जाते । तेरी ये बचकानी बातें ……… ✍️ धीरेन्द्र पांचाल

तुम्हारी बस्ती में

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वो तो करने आएंगे आघात तुम्हारी बस्ती में । हाथ जोड़कर बोलेंगे कुछ बात तुम्हारी बस्ती में । जात पात सब भूल भुलाकर तुमको गले लगाएंगे , बेचेंगे वो खड़े खड़े जज्बात तुम्हारी बस्ती में । दोहराएंगे नये नये अध्याय तुम्हारी बस्ती में । बड़े बुजुर्गों को भी देंगे राय तुम्हारी बस्ती में । कुछ पूछोगे पिघल जाएंगे, हँसकर तुमसे लिपट जाएंगे , फिर बोलेंगे बहुत हुआ अन्याय तुम्हारी बस्ती में । खुद का करने आएंगे उद्धार तुम्हारी बस्ती में । जीतेंगे तो भड़केंगे अंगार तुम्हारी बस्ती में । सोच समझकर अपने मत का करना तुम उपयोग , वरना ,खुल जाएगा गुंडों का व्यापार तुम्हारी बस्ती में ।  धीरेन्द्र पांचाल