बचकानी बातें
तेरी ये बचकानी बातें , तेरी वो बचकानी बातें ।। हर रोज जगाया करती मुझको वो शैतानी बातें । तेरी ये बचकानी बातें ……… हंसना और शर्माना तेरा करती दिल पे घातें । पीछे मुड़ फिर आगे बढ़ती हो जाती बरसातें । जुल्फ हटे गालों से खुले हजारों दिल मे खाते । तेरी ये बचकानी बातें ……… अधरों की लाली से झलके , चाहत की बारातें । माथे की सिकुड़न तेरी सब कह जाती जज़्बातें । तेरे ही यादों से अब तक जिंदा अपनी रातें । तेरी ये बचकानी बातें ……… फूलों को ही सहनी पड़ती काटों की आघातें । पंखुड़ियों से चलती जिनके प्यार वफ़ा के नाते । मिट्टी अपनी खुद करती है उस कंकड़ से बातें । तेरी ये बचकानी बातें ……… संगम वाली चाय प्रिये हम जाम समझ पी जाते । हँस करके तू जान पुकारे जीते जी मर जाते । गर तेरा जो साथ मिले हम खुद संगम हो जाते । तेरी ये बचकानी बातें ……… ✍️ धीरेन्द्र पांचाल